पूज्य श्रीसीतारामदास ओंकारनाथ जी महाराज

महात्मा श्री सीताराम ओंकारनाथ जी की अमोघ वाणी---भगवान अपने भक्त से कह रहे है-
'‘अरे भक्त! तुझे कोई भय नहीं, तू केवल नाम ले। मैं भय का भय, भीषण का भीषण, सब क्लेशों को दूर करने वाला तथा सदा तेरी विपत्तियों का नाश करने वाला हूँ। ‘मैं तेरा’ कहकर मेरी शरण में जो आता है, उसे अभयदान करना मेरा व्रत है। आकाश टूट कर पृथ्वी पर गिर पड़े, प्रलय की अग्नि जल उठे, साथ ही कोटि व्रजपात होने लगे, भयंकर महाझंझावत से विश्व-ब्रह्माण्ड कांप उठे, सातों समुद्र उमड़ पड़ें; अरे प्रियतम! तू डर नहीं। मैं तुझे छाती से लगाकर तेरी रक्षा कर रहा हूँ–यह बात मत भूल। कलियुग में मैं नामरूप में आया हूँ। नाम ले। तेरा सब भार मैंने ले लिया है। मैं हूँ तेरा, अरे, मैं हूँ तेरा।’"


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