प्रेम रस सिद्धान्त (भाग 15)
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🙏🏼श्रीमद् सद्गुरु सरकार की जय🙏🏼
✨प्रेम रस सिद्धान्त (भाग 15) - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज✨
🌷"श्री राधे"🌷
🌿अध्याय 1 - जीव का चरम लक्ष्य 🌿
डार्विन को यह सन्देह था कि यदि ईश्वर होता और दयालु होता एवं सर्वशक्तिमान् होता, जैसे कि आस्तिक लोग कहते हैं तो वह दुःखमय संसार न बनाता । इतना ही नहीं यदि ईश्वर ने संसार बनाया है तो यह शंका भी स्वभावत: आती है कि ईश्वर ने जीवों को भी बनाया होगा और यदि जीवों को भी बनाया है तो फिर जीव नित्य, अनादि, अज आदि नहीं हैं । पुन: वेद-शास्त्र से घोर विरोध हो जायगा । वेद कहता है -
अजामेकां लोहितशुक्लकृष्णां बह्वी: प्रजा: सृजमानां सरूपा: ।
अजो ह्येको जुषमाणोऽनुशेते जहात्येनां भुक्तभोगामजोऽन्य: ॥ ( श्वेता. 4-5 )
ज्ञाज्ञौ द्वावजावीशनीशावजा ह्येका भोक्त्तृ भोग्यार्थयुक्त्ता।
अनन्ताश्चात्मा विश्वरूपो ह्यकर्ता त्रयं यदा विन्दते ब्रह्ममेतत् || ( श्वेता. 1-9 )
गीता कहती है -
ममैवांशो जीवलोके जीवभूत: सनातन: । ( गीता 15-7 )
प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि ॥ (गीता 13-19 )
रामायण भी कहती है -
ईश्वर अंश जीव अविनाशी । चेतन अमल सहज सुखराशी ॥
इन दो शंकाओं का समाधान सुनिये । ईश्वर ने संसार बनाया ही नहीं । तब तो नास्तिक कहेंगे - बस यही तो हम भी कह रहे हैं । किन्तु उससे आगे और सुनिये । ईश्वर ने संसार को प्रकट किया है, नव निर्माण जीवात्माओं का नहीं किया है । जीव तो अनादिकाल से हैं एवं उनके अनन्तानन्त कर्म भी साथ में हैं किन्तु ईश्वर ने उन्हें प्रकट कर दिया जिससे वे भी मुक्ति के हेतु प्रयत्न करें ।
इसी से वेद कहता है -
सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथा पूर्वमकल्पयत् दिवं च पृथिवीं चान्तरिक्षमथोस्व: । ( ऋग्वेद )
अर्थात् जिस प्रकार पूर्व-सृष्टि थी उसी प्रकार ईश्वर ने कल्पना की । बस कल्पना करते ही विश्व बन गया । जब पूर्व क्रमानुसार ही विश्व प्रकट किया गया तब यह प्रश्न ही समाप्त हो गया कि जीव को ईश्वर ने नया-नया बनाया । सृष्टि शब्द का अर्थ ही यह है 'सृज विसर्गे' अर्थात् छोड़ना । जन्म का अर्थ भी यही है 'जनि प्रादुर्भावे' अर्थात् प्रकट होना । अर्थात् जन्म या सृष्टि नव-निर्माण के बोधक शब्द नहीं हैं । जल में जैसे बिजली थी उसे प्रकट किया गया उसी प्रकार प्रलयकाल में ब्रह्मस्थ जीवों को पुन: प्रकट किया गया और जिस योग्यता में प्रलय हुआ था उसी में वे पुन: खड़े कर दिये गये । जिस प्रकार पूर्व-असमाप्त क्रिकेट-मैच यथापूर्व आरम्भ हो जाता है ।
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