सिनेमा नही देखना है
👉सिनेमा से बढ़कर व्यभिचार काम के अड्डे क्या होंगे? इससे बड़ा अड्डा आजतक तो हमने नही देखा । तुम्हारे सारे जीवन का नक्शा सिनेमा पर टिका है ।
छोरो! छोरियो! सिनेमा से बढ़कर मलिन वस्तु क्या हो सकती है? बढ़िया से बढ़िया फ़िल्म हो चाहे, पर मलिन वृति के परमाणु उसमे भरे पड़े है । तुम ( सिनेमा देखने वाले ) क्या परमार्थ की बात करोगे । अभिनेत्रियां मलिनता की मूर्ति है, काम के परमाणु का चारो ओर प्रवाह वहा रही हैं । जीवन का इतना नग्न चित्र;; प्रवचन भरा चित्र तुम क्यों देखते हो? यदि तुम कुत्ते की मौत मरना न चाहो तो फिर सिनेमा क्यों देखते हो? एक भी सिनेमा देखने वाले के जीवन में अध्यात्म नही आ सकता।
सिनेमा देखने वालो के लिये चाहे वे अपने से अपने हों, हमारे पास कोई स्थान नही है । सबकी अंतिम 15साँस में पूरी खबर ले ली जायेगी ।
श्री राधा महाभाव में नित्य स्थित परम् पूज्य संत श्री राधा बाबा जू👏🏻👏
Comments
Post a Comment