वैष्णव
🌀🌿🙏🏼 *वैष्णव कौन होता है?*
वैष्णव कौन है यह प्रश्न महाप्रभु से एकाधिक बार किया गया,
जिसका वर्णन श्री चैतन्य चरीतामृत में है
महाप्रभु वैष्णव सेवा तथा नाम संकीर्तन पर अधिक बल देते थे।तो स्वाभाविक प्रश्न होता भक्तों का कि
"प्रभु वैष्णव कौन है?क्या लक्षण है वैष्णव के?"
*के वैष्णव?चिनिवो केमोने?के वैष्णव कह तार सामान्य लक्षण*
पहली बार जब महाप्रभु से पूछा गया तो उन्होंने कहा-
*जार मुखे शुनि एकबार कृष्ण नाम।पूज्य शेई सभाकार*
जो एकबार भी कृष्ण नाम ले वही वैष्णव।वही सब प्रकार से पूज्य।क्योकि नाम प्रभाव से वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है
परन्तु अगले साल भक्तों ने यही प्रश्न महाप्रभु से दोबारा किया।यह देखकर महाप्रभु मुस्कुरा दिए।वो उनका आशय समझ गए
भक्त थोड़ी दुविधा में थे
महाप्रभु ने कहा था जो एकबार नाम ले वही वैष्णव,उसीकी पूजा सेवा करो।इस सामान्य लक्षण से प्राय हर मनुष्य वैष्णव है,क्योकि ऐसा तो कोई होता ही नही जिसने कभी न कभी किसी कारण से जीवन मे भगवान का नाम न लिया हो।सबकी सेवा तो असम्भव है
अतः इसबार भक्तों की शंका निवारण करते हुए महाप्रभु ने मुस्कुराकर वैष्णवों के तारतम्य को बताया।कौन कैसा वैष्णव ये बताया।
वे बोले-
*"जाहार दर्शने मुखे आईशे कृष्ण नाम।ताहारे जानिश तुमि वैष्णव प्रधान"*
जिसके दर्शन मात्र से मुंह से कृष्ण नाम अपनेआप निकले वह वैष्णवों में प्रधान है
【जिस प्रकार पत्थर आदि गिरनेसे कुंड के जल में यदि तरंग उठे,
और पास में कोई जल में खड़ा हो तो तरंग(waves) उस व्यक्ति को अनायास ही आकर छूती है।
वैसे ही जो परम प्रीति वश निरन्तर नाम जपता है,उसके चित्त से आनंद हिल्लोर उठती हैं,जो पास आए व्यक्ति के चित्त में भी transfer हो जाती है।वह व्यक्ति आनंद दोलायित(happy vibrations) चित्त से कृष्ण कृष्ण कह उठता है】
महाप्रभु क्रमशः वैष्णव,वैष्णवतर और वैष्णवतम को आगे और स्पष्ट समझाते हैं
जिसके मुखसे एकबार कृष्ण नाम सुना जाए वह *वैष्णव*
जो निरन्तर कृष्ण नाम ले वयः *वैष्णव तर*
जिसके दर्शन करनेसे कृष्ण नाम मुखसे स्फुरित हो वयः *वैष्णव तम*
🔹🌀🔹🌀🔹🌀🔹🌀🔹
बाद के परिच्छेद में महाप्रभु *वैष्णवों के गुण* बताते हैं।ग्रन्थकार कहते हैं वैष्णवों के सभी गुणों का तो वर्णन नही किया जा सकता ,फिर भी कुछ गुण निम्न हैं-
1 वैष्णव कृपालु होता है
2 द्रोह रहित होता है
3 सत्य वाक तथा सत्य आचरण युक्त होता है
4 सबके लिए समान दृष्टि रखता है
5 निर्दोष,दाता, कोमलचित्त,पवित्र तथा अकिंचन होता है
6 सबका उपकार करनेवाला,शांत होता है
7 कृष्ण एक शरण होता है,अर्थात कृष्ण के बिना किसीकी शरण नहीं लेता
8 अकाम होता है।अपनी इन्द्रिय तृप्ति की इच्छा नहीं करता
9 अनीह होता है।कृष्ण सेवा के अतिरिक्त कोई इच्छा नहीं होती
10 स्थिर,षड रिपुओं को जीतनेवाला होता है
11 मितभुक होता है अर्थात कम खाता है
12 अप्रमत्त होता है
(सुख या दुख दोनों में अधिक प्रमत्त नहीं होता।over react नहीं करता)
13 सदा सतर्क रहता है
14 स्वयम मान न चाहकर मान देनेवाला होता है
15 गम्भीर,दयालु,सबका मित्र,कवि होता है।(अर्थात मधुर भाव परिपाटी से युक्त चतुरता से बोलता है)
16 दक्ष या कार्यकुशल होता है
17 मौनी होता है
निताई गौर राधे श्याम
💐🙏🏻💐
*हे प्रभो !*
अब ऐसी कृपा कीजिये कि मेरी वाणी केवल तुम्हारा ही गुणगान करें,
मेरे हाथ तुम्ही को प्रणाम करें,
मेरे नेत्र सर्वत्र तुम्हे देखें,
मेरे कान तुम्हारें ही गुणों को सुनें,
मेरे चित्त के द्वारा तुम्हारा ही चिंतन हो और...
मेरे हृदय को तुम्हारा ही स्पर्श प्राप्त हो ...
जय श्री राधे कृष्णा जी
🙏🏼🙇🏻♂🌹
श्री राधा चरण रेणू
¸.•*""*•.¸
Զเधे Զเधे ....... शेरु मुजंiल
( Shreeji Gau Sewa Samiti )
🌀🌹🌀🌹🌀🌹🌀🌹🌀🌹
Comments
Post a Comment