प्रेम रस सिद्धान्त (भाग 43)
✨✨✨✨✨✨✨✨✨
🙏🏼श्रीमद् सद्गुरु सरकार की जय🙏🏼
✨प्रेम रस सिद्धान्त (भाग 43) - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज✨
🌷"श्री राधे"🌷
🌿अध्याय 5 - आत्म-स्वरूप, संसार का स्वरूप तथा वैराग्य का स्वरूप🌿
संसार का स्वरूप (Contd.)
------------------
संसार-संबन्धी सुखों की एक बहुत बड़ी भ्रान्ति यह भी है कि प्रत्येक व्यक्ति यह समझता है कि जितने पदार्थ हमारे पास हैं उतने से सुख नहीं मिल सकता है । जैसे, एक लखपति सोचता है कि यदि हम करोड़पति हो जायें तो बस, सब ठीक हो जायगा, इत्यादि, किन्तु यह भ्रममात्र है । कल्पना कीजिये कि प्रीमियर (premier) कहीं जा रहा है । देहात के किसी स्थान पर उसकी मोटर खराब हो गई, वह दूसरी मोटर से चला गया । उस बिगड़ी हुई मोटर की बनावट, चमक एवं उसके अंदर की सीट, रेडियो आदि देखकर एक घोर मूर्ख ग्रामीण यह सोचता है कि यदि कभी एक सेकेण्ड को भी इस मोटर पर बैठने को मिल जाय तो कितना सुख मिलेगा । अस्तु, कल्पना कीजिये वह ऋणी होने पर दिल्ली अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ चला गया । वह ड्राइवर था, उससे ड्राइविंग करना सीख लिया और संयोगवश उसी प्रीमियर (premier) का वह ड्राइवर हुआ । अब देहात का मूर्ख एक देश के एक प्रीमियर (premier) के बराबर सीट पर उसी मोटर पर बैठा है, जिस पर बैठने की एक सेकेण्ड के लिए ही उसकी कामना थी । यह ठीक है कि उसे बड़ा सुख मिला किन्तु थोड़े दिन बाद ही किसी दिन जब ड्यूटी अधिक देनी पड़ी तो अपनी स्त्री से कहता है कि भिक्षा माँग कर खाना अच्छा है किन्तु ड्राइवरी की नौकरी कुत्ते की नौकरी है । छः घंटे की ड्यूटी है पर साहब ८ घंटे की ड्यूटी लेते हैं । अब इस मोटर को देखते ही ज्वर सा आता है । वह आनंद कहाँ गया जिसकी उसने कल्पना की थी ? अर्थात् किसी वस्तु के पाने के पूर्व इस भ्रांतिजन्य आशा में सुख मिलता है कि भविष्य में सुख मिल जायगा । किन्तु वस्तु की प्राप्ति के पश्चात् सुख तो दूर रहा, दुःख मिलने लगता है । अतएव यह भोलापन छोड़ देना चाहिए कि यदि अधिक अच्छे पदार्थ मिल जायें तो अच्छे दर्जे का सुख मिलेगा । एक भिखारिन को जितना सुख अपने काने कुरूप पुत्र के आलिंगन में मिलता है, उतना ही सुख एक राजमाता को अपने सुन्दर सुकुमार के आलिंगन में मिलता है । आनन्द में कोई अन्तर नहीं है, देखने में महान अन्तर प्रतीत होता है । एक गाय को हरी घास में जो आनन्द आता है, वही आनन्द एक सम्राट को 56 प्रकार के व्यंजन से मिलता है, यद्यपि देखने में महान अन्तर प्रतीत होता है ।
✨✨✨✨✨✨✨✨✨
Comments
Post a Comment