प्रेम रस सिद्धान्त (भाग 49)
✨✨✨✨✨✨✨✨✨
🙏🏼श्रीमद् सद्गुरु सरकार की जय🙏🏼
✨प्रेम रस सिद्धान्त (भाग 49) - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज✨
🌷"श्री राधे"🌷
🌿अध्याय 5 - आत्म-स्वरूप, संसार का स्वरूप तथा वैराग्य का स्वरूप🌿
संसार का स्वरूप (Contd.)
------------------
अब यह सोचिये कि ये तीनों गुण प्रत्येक जीव में अनिश्चित काल से परिवर्तित हो रहे हैं तो फिर ईश्वर या महापुरुष के प्रति हमारे विचार एक रूप के कैसे रह सकते हैं ? कभी हम भगवान् को दयालु मान लेते हैं, कभी न्यायी मान लेते हैं और कभी क्रूर । कभी कहते हैं दयालु नहीं है, हमारे कर्म का फलमात्र देता है और कभी उसे कोसने भी लगते हैं । कहते हैं, 'देखो, ईश्वर के घर में अंधेर है पड़ोसी के १२ बच्चे थे, वह परेशान था, अब तेरहवां हो गया और मेरे एक ही बच्चा था, वह भी आज मर गया', इत्यादि । भावार्थ यह कि यद्यपि भगवान् एवं महापुरुष इन तीन परिवर्तनशील गुणों से अतीत हैं, फिर भी हमारी परिवर्तनशील त्रिगुण की वृत्ति के अनुसार वे तीन प्रकार के दिखते हैं । आश्चर्य यह है कि देखनेवाला यह नहीं जान पाता कि हम ईश्वर को ऐसा देख रहे हैं या हमारे विचार ही ऐसे हो रहे हैं ।
अब यह सोचिये कि जब दो व्यक्तियों में परस्पर यही रोग हो अर्थात् जब स्त्री-पति, पिता-पुत्रादि सब में उपर्युक्त तीनों परिवर्तनशील गुण चक्कर लगा रहे हों, तब उन दोनों की मैत्री कैसे संभव है? हाँ, जब कभी संयोगवश दोनों सात्त्विक हो गये या दोनों राजस हो गये, तब शायद कुछ देर के लिये मैत्री संभव है ।
एक बात और विचारणीय है, वह यह कि यदि दो व्यक्तियों के गुण एक भी हों एवं मात्रा का भेद हो तो भी मैत्री शीघ्र समाप्त हो जाती है । जैसे, किसी पुरुष ने अपनी स्त्री से कहा 'आज चलो पिक्चर देख आवें' । स्त्री भी रजोगुण से युक्त थी, उसने भी कह दिया, 'बड़ा अच्छा है, चलो ।' बस दोनों चल दिये । किन्तु मार्ग में किसी महात्मा का प्रवचन हो रहा था, अब उस प्रवचन के वातावरण ने दोनों पर हमला किया, किन्तु जिसका रजोगुण कम मात्रा का था, उस पर विजयी हुआ एवं जिसका अधिक बलवान् रजोगुण था, उससे हार गया । भावार्थ यह कि मान लीजिये, स्त्री पर सत्त्वगुण विजयी हो गया । स्त्री ने अपने पति से कहा 'आज चलो लेक्चर सुन लें, पिक्चर कहाँ जाती है, कल देख लेंगे' । किन्तु पति का रजोगुण अधिक मात्रा का था, उसने कहा, 'तुम बड़ी भगतिन हो तो जाओ लेक्चर सुनो । हम तो पिक्चर देखने जायेंगे ।' बस, फिर क्या था, पति पिक्चर गया एवं स्त्री लेक्चर में गई । तीन घंटे बाद दोनों अपने-अपने शो से जब घर पहुँचे तो वहाँ खूब विरोधात्मक लेक्चर चला । एक अच्छी खासी पिक्चर तैयार हो गयी । यह गुणों की मात्रा के भेद का परिणाम है ।
✨✨✨✨✨✨✨✨✨
Comments
Post a Comment